जब भी हम किसी से पैसे इनवेस्ट करने की बात करते हैं तो ज्यादातर लोग सलाह देते हैं कि म्यूचुअल फंड में लगा दो. मगर ये किस बला का नाम है, रोजमर्रा का काम करने वाले क्या जानें? यहां हम आपको सरल भाषा में समझाएंगे कि आखिर Mutual Fund Kya hai और इसमें किस तरह से आप इनवेस्ट कर सकते हैं और mutual fund risks क्या होते हैं.

क्या होता है म्यूचुअल फंड? | Mutual Funds in Hindi

आसान भाषा में कहें तो म्यूचुअल फंड से आप अच्छा पैसा कमा सकते हैं. इसमें निवेश करने के लिए आपके पास जरूरी नहीं कि 50 हजार रुपये ही हो, इसमें आप 500 रुपये भी हर महीने की दर से निवेश कर सकते हैं. बहुत से लोग Mutual Funds और स्टॉक मार्केट को एक ही मानते हैं मगर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. म्यूचुअल फंड और शेयर मार्केट बाजार का हिस्सा तो हैं लेकिन इन दोनों में काफी अंतर होता है. म्यूचुअल फंड एक ऐसा संग्रह है जहां पर बहुत सारे लोगों का पैसा एक पारस्परिक रूप में रखा जाता है, धन के इस समूह को सबसे ज्यादा संभव मुनाफा अर्जित करने के लिए मैनेज किया जाता है. Fund को प्रबंधित करने का काम एक पेशेवर व्यक्ति करता है जिसको पेशेवर फंड मैनेजर कहते हैं. 

म्यूचुअल फंड भारत में बहुत लंबे समय से है लेकिन आज भी ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं है. शुरुआत में लोगों की धारणा थी कि म्यूचुअल फंड सिर्फ अमीर लोगों के लिए ही है. मगर धीरे-धीरे ये अवधारणा बदलती गई और आज लोगों का रुझान इस तरफ तेजी से बढ़ रहा है. कोई भी व्यक्ति कम से कम 500 रुपये हर महीने की दर से म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकता है.

भारत में म्यूचुअल फंड का इतिहास | History of Mutuak Funds in India

साल 1963 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार की पहल पर यूनिट ऑफ इंडिया (UTI ) के गठन के साथ भारत में म्यूचुअल फंड उद्योग शुरू हुआ था. इसके पीछे का उद्देश्य छोटे निवेशकों को आकर्षित करना और बाजार से संबंधित विषयों से अवगत कराना था. UTI का गठन साल 1963 में संसद के एक अधिनियम के अंतरगर्त किया गया था. इसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक ने की थी और इसके सभी काम उस समय आरबीआई के अंतर्गत ही होते थे. साल 1978 में यूटीआई को आरबीआई से अलग कर दिया गया और भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI) को आरबीआई की जगह विनियामक और प्रशासनिक नियंत्रण का अधिकार मिल गया. बाद में म्यूचुअल फंड का काम यूटीआई के अंतर्गत होने लगा. 

म्यूचुअल फंड के कितने प्रकार होते हैं? | Types of Mutual Funds in Hindi

म्यूचुअल फंड्स कई प्रकार के होते हैं, जिनको हम 2 कैटेगरी में बांट सकते हैं…

A- संरचना के आधार पर म्यूचुअल फंड्स के प्रकार

1. Open ended Mutual Fund: ओपेन एंडेड फंड्स में निवेशकों को किसी भी समय फंड्स को बेचने या खरीदने की अनुमति होती है. इसमें फंड्स खरीदने या बेचने की कोई निश्चित तिथि या अवधि नहीं होती है. 

2. Close ended Mutual Funds: क्लोज़ एंडेड म्यूचुअल फंड्स में एक निर्धारित परिपक्वता अवधि होती है और निवेशक फंड्स केवल फंड अवधि के समय ही खरीद सकते हैं. इस तरह के फंड शेयर मार्केट में भी शामिल होते हैं, इसके बाद इनको trading के लिए इस्तेमाल किया जाता है. 

3. Interval Funds: अंतराल फंड्स में ओपेन और क्लोज़ एंडेड फंड्स दोनों के साथ मिलकर बना होता है. इसमें दोनों फंड्स की सुविधाएं मिलती हैं. यह निवेशकों को पूर्व निर्धारित अंतराल पर फंड्स का कारोबार करने की अनुमति देता है. उस निर्धारित समय पर फंड्स की ट्रेडिंग की जा सकती है.

B- एसेट के आधार पर म्यूचुअल फंड्स के प्रकार

1. Debt Funds: इस तरह के फंड्स में निवेशक को जोखिम बहुत कम होता है. निवेशक डिबेंचर्स, सरकारी बॉन्ड और दूसरे निश्चित आय में निवेश करते हैं जो सुरक्षित निवेश माना जाता है. डेब्ट फंड्स निश्चित रिटर्न प्रदान करते हैं. जैसे अगर आप एक स्थिर आय चाहते हैं तो ये फंड आपके लिए है. निवेशकों की कमाई अगर फंड्स से 10 हजार अधिक है तो निवेशकों को कर भरना पड़ेगा.

2. Liquid Mutual Funds: यह निवेश भी पूरी तरह से सुरक्षित रहता है. लिक्विड फंड कम समय वाले ऋण उपकरणों में निवेश करते हैं. अगर आप कम समय के लिए निवेश करना चाहते हैं तो ये कैटेगरी आपके लिए है.

3. Equity Mutual Funds: अगर आप लंबा फायदा चाहते हैं तो इक्विटी फंड आपके लिए है. ये फंड्स शेयर मार्केट में निवेश करते हैं और इस तरह के फंड्स में जोखिम भी शामिल होता है. मगर इसमें होने वाला मुनाफा भी दूसरों से दोगुना ज्यादा होता है.

4. Money Market Funds: इस तरह के शॉर्ट टर्म फंड्स में निवेशकों के लिए उचित रिटर्न प्रदान होते हैं. इसमें सुरक्षित जगहों पर निवेश किया जाता है.

5. Balanced Mutual Funds: इस तरह की स्कीम में Equity और Debt फंड का मिलाजुला फायदा मिलता है. इस तरह के म्यूचुअल फंड में जमा हुए फंट को इक्विटी और डेब्ट दोनों जगहों पर निवेश करते हैं.

म्यूचुअल फंड के फायदे | Benefits of Mutual Funds

वैसे तो म्यूचुअल पंड के कई सारे फायदे होते हैं लेकिन जो फायदे ज्यादा महत्वपूर्णं हैं आज हम आपको उनके बारे में बताएंगे.

1. प्रोफेशनल मैनेजमेंट (Professional Management): आपके द्वारा म्यूचुअल फंड्स में लगाया गया पैसा कई विशेषज्ञों द्वारा उनके अनुभव और हुनर के साथ मैनेज किया जाता है. वे जिस फंड में पैसा लगाते हैं उसकी पूरी जानकारी इकट्ठा कर लेते हैं और पूरी तरह से संतुष्ट होकर ही आपका पैसा इनवेस्ट करते हैं.

2. विवधता (Diversification) : सुरक्षित निवेश का मूल मंत्री यही है कि पैसे को एक जगह ना लगाकर कई अलग-अलग जगह बांटकर निवेश कर दो. हर म्यूचुअल फंड में अलग-अलग मुनाफा होता है. 

3. विकल्प (Variety): म्यूचुअल फंड्स में आज हर तरह के व्यक्ति के लिए कोई ना कोई फायदा जरूर है. ज्यादा रिटर्न्स चाहने वालों के लिए, अधिकतम सुरक्षित निवेश की इच्छा रखने वाले या अगर आप अपने निवेश किए हुए पैसों से कुछ और चाहते हैं तो आपके लिए वो भी उपलब्ध है.

4. सुविधाएं (Convenience): म्यूचुअल फंड्स में आप जितनी आसानी के साथ निवेश करते हैं, उतनी ही सरलता के साथ पैसे निकाल भी सकते हैं. निवेश करने के लिए आपको एक फॉर्म भरना होगा जो कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह उपलब्ध होता है. इसके अलावा आप इसी तरह पैसे निकाल भी सकते हैं.

5. टैक्स बैनिफिट्स (Tax Benefits): जब भी आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो शेयर खरीदने और बेचने में टैक्स देना पड़ता है लेकिन म्यूचुअल फंड्स में टैक्स में छूट मिलती है. कुछ फंड्स में तो आपको अपने मुनाफे पर कुछ अवधी तक कोई टैक्स नहीं भरना होता है. 

म्यूचुअल फंड में जोखिम | Mutual Fund Risks

म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने से पहले आपको कुछ दस्तावेज या फॉर्म दिए जाते हैं. उस फॉर्म को भरने से पहले आपको सभी टर्म एंड कंडीशन को अच्छे से पढ़ लेना चाहिए. वरना बाद में कुछ ऐसी चीजें हों जिनके बारे में आपको पता भी ना हो तो समस्या हो सकती है. निवेश करने से पहले फंड्स से जुड़ी सारी जानकारी एकत्रित करना सही होता है, वरना किसी भी नुकसान के आप स्वयं जिम्मेदार होंगे.

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